सत्ययुग हिन्दू धर्मशास्त्र में एक विशेष स्थान रखता है। यह माना जाता है कि इस युग धार्मिकता, शांति और मर्यादा का पूर्ण था। मनुष्य ईश्वर के आसन्न था और कर्म का अनुपालन बिना परेशानी करता था। यह एक चित्र एक सुनहरी स्थिति का है, जहाँ हर प्राणी खुश है और वैभव का अनुभव करता है। सत्ययुग के आदर्श